Shivaji Maharaj Jayanti Information History In Marathi | Essay, Speech

By | February 1, 2018

Shivaji Maharaj Jayanti Information History In Marathi19th February, we celebrate this day as Shivaji Maharaj Jayanti. Shivaji Bhosale, also known as Chhatrapati Shivaji Maharaj. He was born in the hill-fort of Shivneri, near the city of Junnar in Pune district. His father was Shahaji Bhonsle and her mother was Jijabai. His father was a Maratha general who served the Deccan Sultanates. Shivaji was a great Maratha emperor.

He carved out an enclave from the declining Adilshahi sultanate of Bijapur that formed the genesis of the Maratha Empire. There are so many things about Shivaji Maharaj. We can’t explain everything here. But below we are providing a short essay on Shivaji Maharaj’s life in Marathi language. You must be searching for Shivaji Maharaj Jayanti Information History In Marathi language. You can use this short essay as your speech.

Shivaji Maharaj Jayanti Information History In Marathi

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Shivaji Maharaj Jayanti Information History In Marathi

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2 thoughts on “Shivaji Maharaj Jayanti Information History In Marathi | Essay, Speech

  1. Smt kirti Y Asawale

    छत्रपती शिवाजी महाराज की “आगरा –से छुटका “ का वर्णन काव्य के रूप मे – श्रीमति किर्ति आसवले, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया मुंबई
    कमर पर लटकती तलवार, घोड़े पर हुये सवार,पीठ पर विशाल सी ढाल
    आंखो मे हीरो सी चमकति धारा , गले मे भरे मोतियो की माला ,
    रवि से उज्ज्वल शशि से सुंदर ,मस्तक पर चढ़ाकर पोलादी शिरस्त्राण ,
    ऐसे थे दक्खन के तेजस्वी राजा छत्रपती शिवाजी महान।
    बात हो रही है 16 वी सदी की (गोष्ट आहे 16व्या शतकातली )
    जब दिल्ली के तख्त पर बैठा करता था ,औरंगजेब नाम का मुगलो का खान ।
    (जेव्हा दिल्ली च्या तख़्ता वर बसला होता औरंजेब नावाचा मोग्लांचा खान )
    माता को दिया वचन निभाने ,मातृ भूमि की आन रखने , हिंदवी स्वराज्य की स्थापना करने,
    पहुंचे आगरा मराठो के छत्रपती शिवाजी महान।
    हुआ दो बलशाली ग्रहो का मेल, ( झाला दोन बलशाली ग्राहांचा मेल)एक था रवि दूसरा ब्रहस्पति
    रवि सा तेजस्वी दक्खन का राजा
    फैला रहा था चारो दिशों मे अपने किरणों का उजियारा ।
    जब हुआ शुरू औरंजेब का मुगलई दरबार ( जेव्हा जला सुरू औरंगजेब चा मोगलाई दरबार)
    सय्याद्री का शिखर और जीजा माता का जिगर
    आ पहुंचा उस मुगली दरबार,
    खून खोल रहा था 2,पर आन थी मातृ भूमि की( पण आन होती त्या मातृ भूमी ची )
    इसलिए झुककर मुजरा करना पड़ा उस भरी दरबार।
    जिसमे हो रहा था पंच हजारी गीधड़ो का सन्मान
    उसी भरी दरबार मे राजा का हो रहा था घोर अपमान ( त्याच भर्या दरबारत झाला राजा चा घोर अपमान )
    गरज उठा मराठो का वह शेर 2 ( गरजला शेर मराठ्यांचा )
    रामसिंह कौन खड़ा है हमसे आगे ? कौन खड़ा है हमसे आगे ? इस भरे दरबार मे ?
    जो भाग गया था कोंडाना मे मर्द मराठो से हर के ।
    क्या मतलब है इसका 2 (काय मतलब आहे याचा )
    जो पीठ दिखाकर भागे वो भरी दरबार मे हमसे आगे ?
    कैसा हुआ था यहा अनर्थ 2
    हिलने को जहा न हुआ था कोई जहा समर्थ
    उसी भरी दरबार मे किसकी है ये दहाड़ ?( कोणाची आहे ही दहाड़? )
    हो न हो , होगी यह तो सिवा की ही सिव्हगर्जना 2
    मै हु पुत्र बलशाली शहाजी का ,मै हु पुत्र वीर जीजा का
    नहीं चाहिए तुम्हारी मांनसबे नहीं चाहिए तुम्हारी जागीरे
    नहीं डर है मुझे मौत से न ही किसी अंजान डगर से
    मैं तो टकराना जानता हु अफजल जैसे पहाड़ो से ( माझी टक्कर होते अफजल जाएस्य पहाड़नशी)
    मै बुझाना जनता हु जलते हुए अंगारो को आंधियो को और तूफानो को
    मै किसी से नहीं घबराता( आह्मी कोणास ही नाही घबरत )
    क्युओकी मेरी रक्षक है भवानी माँता।2 ( कारण माझी रक्षक आहे भवानी माता )
    फिर हुआ बड़ा अनर्थ , हाय हुआ बड़ा अनर्थ ,दगा देकर कर , कर दीया गया कैद
    द्ख्हन के मरोठों का वह शेर ( दगा देऊनि कैद केला मराठ्यांचा तो शेर)
    छाट कर पंख घायल कर डाला हाय ,
    गरुढ़ था वह मतवाला , आसमान को छूनेवाला ।
    डर था 2 उनको , काही ऊंचाई की सीमा पार कर
    समा न ले सारी दुनिया को अपने पंखो तले
    और झपट कर फाड़ न डाले मुगुलों को अपने पोलादी पंजो तले ।
    उधर राजा तो ऐसे फसे , मातृभूमी की याद मे हो रहे थे बेहाल (मातृभूमि च्या याद ने झाले होते बेहाल)
    बहुत सोचा पर काही नज़र न आ रही थी मंज़िल 2
    आखिर बुद्धि से ही जंग लढने की ठान ली, धरती से ही आकाश को छूने की आन ली
    आज कल कहते है gorilla war जिसे
    सिवा की ही खोज है गनीमी कावा कहते थे तब उसे २
    अचानक शत्रु पर वार करना वार कर पल मे ही मर गिराना
    आजकल कहते है MR INDIA इसे २
    16वी सदी मे कहते थे छत्रपति शिवाजी उसे .२
    दो महीने बीत चुके थे सिवा बीमार पड़ने लगे थे 2
    जब राम धनुष्य से तीरो पर तीर चलने लगे थे
    धर्म के नाम पर बिना किसी त्योहार के
    मिठाइयो के पिटारे पिंजरे से निकालने लगे थे 2
    और गोर गरीबो मे बांटने लगे थे ।
    फिर एक दिन हुआ ऐसा गज़ब ( मग एक दिवस झाला आसा गज़ब )
    हर हर महादेव की गर्जना करते 2
    माँ भवानी को याद करते ,निकाल पड़ा एक ऐसा तीर 2
    आंधियों मे और तूफानो मे निकाल पड़ा पिंजरे से बाहर
    काले काले बदलो को चीर ॥
    अपने साथियो का हाथ लिए, प्यारे शंभू को साथ लिए ( आपल्या सहकारचा हाथ घेउनी आणि लाडक्या शंभू ला साथ घेउनी )
    निकाल पड़ा पिंजरे की बाहर वह नर वीर ।
    निकाल पडा मदारी मेहतर , निकाल पड़ा हिरोही फर्जद
    निकाल पड़े नेताजी तानाजी बाजी जैसे सब के सब, राजा के वीर महान ,
    राजा के वीर महान और कुछ ही पल मे कर डाला औरंजेब का खाली मकान ।
    कहा से निकला पहाड़ी चूहा ,कहा से भागा हाय, सब दीवारों को तोड़ कर !!( सारया भिनतिना भेदून)
    सोच सोचकर, 2 हर शक्स और मिर्ज़ा राजा भी था परेशान 2
    फुट फुट कर रोने लगे 2 अमीन जाफ़र और फूलाद ।२
    अब क्या होगा हाय अब क्या होगा ?
    शत्रु का खेल खतम हो चुका था, सबके आंखो मे धूल झोंक कर
    मराठो का वह शेर निकाल चुका था ।
    आँख बबूला हो उठा तख्त पर बैठा मुगुलों का खान। २
    सिवा जैसे आँधी को छेड़कर खतरे मे पड गई सबकी जान ( शिवा जैसी आँधी ला छेडून खतर्यात पडली सर्वांची जान )
    भड़कती हुई ज्वाला मे हाथ डालकर पछताने लगा बादशाह नादान ( भड़क्त्या ज्वाला मध्ये हात घालून पछतावला बादशाह नादान)2
    डूब चुका था घनघोर अंधेरा आ रही थी पूरब के लाली की पहचान
    अपनी माँ की आन से बढ़कर ना था जिसको कोई अभिमान
    भेस बदलकर आ पहुंचे सिवा घर अपने, मातृभूमि की रखने शान । २
    इसलिए कहते है उसे राजाधिराज योगी राज छत्रपती महान। ( म्हणून च म्हंत्यात त्याला राजाधिराज योगी राज छत्रपती महान)
    कर्नाटक से कन्याकुमारी तक ,काशी हरिद्वार से दिल्ली के तख्त तक
    जो स्वराज्य के गाथा बनकर छोड़ गए कुछ ऐसे निशान ( जयाने स्वराज्य ची गाथा बनूँ सोडिलिए काही ऐसे निशाण)
    देकर अपने तन, मन और प्राणो का बलिदान ,पिता –पुत्र हो गए वतन पर कुर्बान( देउनी तन मन आणि प्राणांचा बलिदान पिता पुत्र जाहले वतनावर कुर्बान )
    ऐसे हो गए महाराष्ट्र के राजा शिवाजी छत्रपती महान । ( ऐसे हाऊनी गेले महाराष्ट्र चे राजा शिवाजी छत्रपती महान) जय भवानी जय शिवाजी ।

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